श्री राम कथा से गुंजायमान हो रहा रीठी

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जबलपुर/सिहोरा…. रीठी के श्रीराम जानकी मंदिर प्रांगण में चल रही रामकथा में सोमवार को कथावाचक महंत सीताराम शरण जी महाराज ने राम-भरत मिलाप का प्रसंग सुनाया। देखा गया कि कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कथा वाचक ने राम केवट, भरत-राम मिलाप के प्रसंग को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा पहले संस्कार ऐसे हुआ करते थे कि एक ही छत के नीचे 25 परिवार मिलकर एक साथ जीवन यापन करते थे। लेकिन आज 2 परिवार एक साथ एक छत के नीचे रहना पसंद नहीं करते, यह संस्कार का ही फर्क है। कथावाचक ने कहा कि अच्छे विचार से घर को स्वर्ग बनाया जा सकता है। श्रीराम के 14 वर्ष वनवास यात्रा के बारे बताते हुए उन्होंने कहा कि भरत के मामा घर से आने के बाद सीधे माता कैकई और राम भैया को ढूंढते हुए उनके कक्ष में जाते हैं।

         प्रभु श्रीराम को बनवास की खबर सुन के रोने लगे भरत

उन्हें इसका आभास तक नहीं होने दिया कि उनके प्राण प्रिय भैया और भाभी 14 वर्ष के बनवास को अयोध्या से निकल गए। जानकारी होते ही वे रोते बिलखते और कैकई माता को कोसते हुए कहते हैं पुत्र कुपुत्र हो सकता है मगर माता कुमाता नहीं होती। इस बात को तुमने सिद्ध किया है माता कुमाता होती है। यह कलंक यह पाप मेरे सर पर लगा। भरत ने अपने भाई को राजगद्दी के लिए बनवास करा दिया। तभी कौशल्या और सुमित्रा दोनों भरत को समझाती है कि पिताजी अब इस दुनिया में नहीं रहे। आओ उनका अंतिम संस्कार कर भैया को ढूंढने जाएंगे। राजा दशरथ की मृत्यु की खबर सुनकर भरत रोने लगते हैं। कर्म पूरा कर अयोध्या से अपनी तीनों मां के साथ अपने भाई को वापस लाने के लिए निकल पड़ते हैं। पीछे-पीछे प्रजा चल पड़े। निषाद राज से जानकारी लेकर भरत अपने माताओं के साथ चित्रकूट पर्वत पर जाते हैं।

             दशरथ के मौत की खबर सुन व्याकुल हो गए राम

जहां लक्ष्मण जंगल से लकड़ियां चुन रहे थे। जैसे ही चक्रवर्ती सेना और भरत को आते देखा। आग बबूला होकर राम के पास आते हैं और कहते हैं कि भरत बड़ी सेना के साथ हमारी ओर बढ़ रहा है। तभी राम मुस्कुराते हुए कहते हैं ठहर जाओ। अनुज भरत को आने तो दो। भरत राम के चरणों में गिरकर क्षमा याचना करने लगते हैं। फिर राम गले से लगाते हैं। भरत मिलाप के बाद तीनों माताओं का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते हैं और माता सीता भी अपनी तीनों सास के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेती हैं। उसके बाद भरत पिता के बारे में राम से कहते हैं कि अब हमारे बीच पिता श्री नहीं रहे यह शब्द सुनकर श्री राम और सीता लक्ष्मण व्याकुल हो शोकाकुल रहने के बाद राम को अपने साथ ले जाने के लिए भरत मिन्नत करते हैं।

                    क्षेत्र की प्रतिभाओं को सम्मान

कार्यक्रम संयोजक विपिन तिवारी के मार्गदर्शन में कथा स्थल पर क्षेत्र की प्रतिभाओं को सम्मानित भी किया गया। स्वर्गीय संजय सकवार एवं पंडित शर्मा पुरस्कार उत्कृष्ट छात्र-छात्राओं को प्रदान किया गया। इतना ही नहीं खेल के क्षेत्र में 7 प्रतिभाओं को भी सम्मानित किया गया वहीं गोल बाजार रामलीला कमेटी के अध्यक्ष विपिन जैन को एवं उत्कृष्ट शिक्षक के लिए नंदराम सेनी को सम्मानित किया गया।

                   बुंदेली लोक गीत का कार्यक्रम 14 को

जानकारी देते हुए कार्यक्रम संयोजक विपिन तिवारी ने बताया कि कथा के आखिरी दिन 14 जनवरी को प्रातः कालीन बेला में हवन पूजन होगा तथा दोपहर बारह बजे से शाम चार बजे तक विशाल भंडारे का आयोजन रखा गया है। इसी दिन संध्या कालीन बेला में बुंदेलखंड के सुप्रसिद्ध कलाकार जित्तू खरे बादल साथी कलाकारों के साथ शानदार प्रस्तुति देंगे।
  श्री राम कथा में पहुंचे  बहोरीबंद विधायक प्रणय प्रभात पाण्डेय, भरत पटेल मंडल अध्यक्ष,मिल्लूलाल चक्रवर्ती,संजय नागर, प्रेम नारयण तिवारी,अजय सोनी, धनुष कुमार दुबे,श्री जी मेडिकल किशन मिश्रा, भगवान दास साहू, संजय राय, मुकेश राय,पवन पटेल, रविशंकर पटेल,पच्चम गडारी,संजय श्रीवास्तव,रोशन पटेल,रवि कुमार खाटूश्याम जी परिवार,मनोज पाटकर, अमृतलाल राजामल राय, रमेश श्रीवास्तव, विष्णु चनपुरिया, रामकुमार बर्मन, रामनाम बेन,कोमल सिंह,सियाशरण पटेल,रम्मू पटेल, बलीराम राय जितेंद्र सिंह चौहान, सुरेश महोबिया, नंदू राय, प्रमोद कुमार सिवने,बिंजन श्रीवास, रिषभ पाल ,मयंक कंदेले, सुरेंद्र साहू, मयूर अग्रवाल आज की उपस्थिति थी

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