श्रीकृष्ण ने मुठ्ठी चावल खाकर सुदामा की दरिद्रता दूर की….. पंडित त्रिपाठी

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सिहोरा – शुक्ला जी की बखरी वार्ड क्रमांक 8 में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में अंतिम दिवस श्रीकृष्ण सुदामा प्रसंग पर श्रीकृष्ण-सुदामा पात्र की झांकी का मंचन से श्रोता व दर्शक भावविभोर हो झूम उठे।कथावाचक पंडित इंद्रमणि त्रिपाठी ने श्रीकृष्ण-सुदामा की आदर्श मित्रता की कथा सुनाते हुए कहा कि सुदामा से परमात्मा ने मित्रता का धर्म निभाया। राजा के मित्र राजा होते हैं रंक नहीं, पर परमात्मा ने कहा कि मेरे भक्त जिसके पास प्रेम धन है वह निर्धन नहीं हो सकता। कृष्ण और सुदामा दो मित्र का मिलन ही नहीं जीव व ईश्वर तथा भक्त और भगवान का मिलन था।आज मनुष्य को ऐसा ही आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए।
कथावाचक श्री त्रिपाठी ने आगे कहा कि कृष्ण और सुदामा जैसी मित्रता आज कहां है। यही कारण है कि आज भी सच्ची मित्रता के लिए कृष्ण-सुदामा की मित्रता का उदाहरण दिया जाता है। द्वारपाल के मुख से पूछत दीनदयाल के धाम, बतावत आपन नाम सुदामा, सुनते ही द्वारिकाधीश नंगे पांव मित्र की अगवानी करने पहुंच गए। लोग समझ नहीं पाए कि आखिर सुदामा में क्या खासियत है कि भगवान खुद ही उनके स्वागत में दौड़ पड़े। श्रीकृष्ण ने स्वयं सिंहासन पर बैठाकर सुदामा के पांव पखारे। कृष्ण-सुदामा चरित्र प्रसंग पर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
*दो मुठ्ठी चावल खाकर श्रीकृष्ण ने दिया दो लोकों का राज्य- पौराणिक कथा प्रवचन में कथावाचक त्रिपाठी ने आगे बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने मित्र सुदामा से कहा कि भाभी ने मुझे कुछ जरूर भेजा होगा सुदामा पोटली में चावल लिए छुपा रहे थे किंतु श्रीकृष्ण ने उसे छीन लिया और कहते हैं एक मुट्ठी चावल खाया तो उन्हें एक लोक का और दूसरी मुट्ठी चावल खाने से दो लोक का राज्य मिल गया जैसे ही तीसरी मुट्ठी खाने लगे तो रुकमणी ने हाथ पकड़ लिया और कहने लगी यह प्रसाद हम लोगों को भी खाना है ।इस प्रकार श्रीकृष्ण ने मित्र सुदामा की दरिद्रता समाप्त कर दी।
उन्होंने आगे कहा कि श्रीकृष्ण को सत्य के नाम से पुकारा गया। जहां सत्य हो वहीं भगवान का जन्म होता है। भगवान के गुणगान श्रवण करने से तृष्णा समाप्त हो जाती है। इस अवसर पर भगवान श्री कृष्ण एवं सुदामा के सुसज्जित पात्रों का सजीव चित्रण वा मंचन भी किया गया।महिला मण्डल ने श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता के संगीतमय भजनों की सुमधुर प्रस्तुति की गई।जिससे श्रोता व दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे।भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा की नयनाभिराम झाँकी की आरती दिलीप दुबे जबलपुर, शीतल दुबे, अर्जुन गर्ग,जय प्रकाश तिवारी, प्रकाश कुररिया, बालमुकुंद चौबे, रमेशदत्त मिश्रा, रामस्नेही चौबे ने की।महिला मंडल द्वारा धार्मिक व मंगलमय भजनों के साथ की गई।

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