खनिज संपदा का गढ़ ‘कटनी’ अब बनेगा प्रदेश की ‘माइनिंग कैपिटल
बड़वारा में 50 हेक्टेयर डोलोमाइट क्षेत्र आरक्षित

कटनी ….. मध्य प्रदेश का कटनी जिला अब अपनी भौगोलिक सीमाओं को लांघकर वैश्विक मानचित्र पर ‘माइनिंग हब’ के रूप में उभर रहा है। 20 से अधिक प्रकार के बेशकीमती खनिजों की उपलब्धता और रिकॉर्ड राजस्व वृद्धि के साथ कटनी अब प्रदेश की ‘खनिज राजधानी’ बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। जिला प्रशासन की सक्रियता से यहाँ न केवल औद्योगिक निवेश को गति मिल रही है, बल्कि रोजगार के नए द्वार भी खुल रहे हैं।
औद्योगिक विस्तार: बड़वारा में बड़े निवेश की तैयारी
हाल ही में राज्य शासन ने जिले की बड़वारा तहसील के बड़ेरा एवं बचरबाड़ा ग्राम में एक बड़ा निर्णय लिया है। यहाँ 50 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में तीन बड़े डोलोमाइट ब्लॉक्स को माइनिंग कार्पोरेशन के पक्ष में आरक्षित किया गया है। इस कदम से जिले में खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना और भारी निवेश की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।
खनिजों का अनमोल खजाना: अब सोना और कोयला भी
कटनी की धरा के गर्भ में चूना पत्थर, डोलोमाइट, बॉक्साइट, मार्बल और आयरन ओर जैसे खनिजों का भंडार तो पहले से ही था, लेकिन अब विभागीय अन्वेषणों में यहाँ सोना और कोयले के नवीन भंडार भी मिले हैं। यह खोज भविष्य में जिले की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
राजस्व में ऐतिहासिक उछाल
कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के कुशल मार्गदर्शन और बेहतर प्रबंधन का परिणाम शासन के खजाने में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। विगत वर्षों की औसत आय 100 करोड़ रुपये से बढ़कर अब 160 करोड़ रुपये वार्षिक के पार पहुँच गई है। प्रशासन का जोर अब केवल उत्खनन पर नहीं, बल्कि खनिज के शत-प्रतिशत स्थानीय उपयोग और नई औद्योगिक इकाइयां लगाने पर है।
तकनीक से अवैध उत्खनन पर प्रहार
प्रशासन ने तकनीक के जरिए पारदर्शिता और निगरानी को मजबूत किया है। बड़वारा रोड पर स्थापित आधुनिक ई-चेक गेट से वाहनों के दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच की जा रही है। माइनिंग सर्विलांस सिस्टम के माध्यम से अवैध खनन पर प्रभावी लगाम लगाई गई है। लंबित आवेदनों का समय सीमा में निराकरण कर वैधानिक खनन को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
जिला प्रशासन का कहना है कि “कटनी की प्रचुर खनिज संपदा और हमारी प्रशासनिक सक्रियता मिलकर जिले को भारत के औद्योगिक परिदृश्य में एक नई पहचान दिला रहे हैं। हमारा लक्ष्य पारदर्शिता के साथ राजस्व बढ़ाना और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करना है।”
