NH-30 बना ‘खतरे का रास्ता’: मझौली बाईपास पर बंद स्ट्रीट लाइट से बढ़ रहे हादसे सिहोरा
सिहोरा…….नेशनल हाईवे-30 पर स्थित मझौली बाईपास इन दिनों गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और एनएचएआई (NHAI) की बेरुखी का शिकार बना हुआ है। यहां लगी स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से बंद पड़ी हैं, जिसके कारण रात होते ही पूरा इलाका गहरे अंधेरे के आगोश में समा जाता है। आलम यह है कि यह महत्वपूर्ण बाईपास अब ‘ब्लैक स्पॉट’ में तब्दील हो चुका है, जहां रोजाना वाहन चालक अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं।
1. अंधेरा बना हादसों की वजह, काल बनकर दौड़ रहे वाहन
सूरज ढलते ही मझौली बाईपास पर विजिबिलिटी (दृश्यता) पूरी तरह शून्य हो जाती है। हाईवे पर तेज रफ्तार से दौड़ते भारी वाहन, अचानक सामने आ जाने वाले मवेशी और सड़क किनारे बिना किसी इंडिकेटर या सूचक के खड़े ट्रक इस घने अंधेरे में दिखाई नहीं देते, जिससे आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं। देश के अन्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी इस तरह की लापरवाही के कारण पूर्व में कई गंभीर सड़क हादसे सामने आ चुके हैं, लेकिन सिहोरा का जिम्मेदार अमला इससे कोई सबक लेने को तैयार नहीं है।
2. एनएचएआई बेपरवाह, प्रशासन को शायद बड़े हादसे का इंतजार
हाईवे की इस बदहाली को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) पूरी तरह बेपरवाह हो चुका है और स्थानीय प्रशासन को शायद किसी बड़े और दर्दनाक हादसे का इंतजार है। आए दिन हो रही दुर्घटनाओं के बाद भी अधिकारियों की नींद नहीं टूट रही है। जिम्मेदार अधिकारियों का यह अड़ियल रवैया साफ दर्शाता है कि उन्हें जनता की जान-माल की सुरक्षा से कोई सरोकार नहीं रह गया है।
3. जिम्मेदारी मढ़ने का खेल, तालमेल के अभाव में जनता परेशान
यह हाईवे तकनीकी रूप से एनएचएआई के अधीन आता है, लेकिन लाइटिंग और मेंटेनेंस की जिम्मेदारी स्थानीय विद्युत विभाग व प्रशासनिक एजेंसियों के समन्वय से तय होती है। इसी तकनीकी घालमेल का फायदा उठाकर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर मढ़ने में व्यस्त हैं। विभागों के बीच आपसी तालमेल और इच्छाशक्ति के इसी अभाव का खामियाजा भुगतते हुए स्थानीय जनता और राहगीर हर रात मौत के साए में सफर कर रहे हैं।
4. झूठे आश्वासनों से नाराजगी, जनआक्रोश के कारण आंदोलन की सुगबुगाहट
क्षेत्रीय नागरिकों और वाहन चालकों ने इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही थमा दिए गए। धरातल पर अब तक एक भी लाइट को सुधारा नहीं जा सका है। प्रशासन के इस टालमटोल रवैये से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पनप रहा है और अब नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे चक्काजाम और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
5. तत्काल सुधार और सुरक्षा ऑडिट है समय की मांग
मझौली बाईपास को सुरक्षित बनाने के लिए अब केवल पैचवर्क नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने की जरूरत है। नागरिकों की पुरजोर मांग है कि बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को युद्धस्तर पर तुरंत चालू किया जाए, पूरे बाईपास का सुरक्षा ऑडिट हो, और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में चमकीले रिफ्लेक्टर व चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। इसके साथ ही, रात के समय पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जानी चाहिए ताकि सड़क किनारे अवैध रूप से खड़े होने वाले वाहनों पर नकेल कसी जा सके।


